कथित और लिखित भाषा में अंतर
यहां पर बात वर्णमाला की नहीं हो रही है, अपितु यह की लिखित रूप में भाषा कुछ अलग ही होता है।
उदाहरण के रूप में शीर्षक पंक्ति में जो लिखा हुआ है वह यदि "बोलचाल की भाषा और लिखने की भाषा में फर्क होता है" लिखा जाता तो वह कथित भाषा होती।
इसी कारण से सरकारी सूचना या आदेश पढ़ कर समझने में अधिकांश लोगों को कठिनाई होती है, क्योंकि उस रूप में कोई भी बात नहीं करता।
साधारण बोलचाल की हिंदी में अनेक उर्दू के शब्द उपयोग होते हैं। यदि आप उनके बिना बात करने का प्रयास करें, तो संभवतया आप नालंदा विशाल हिंदी शब्दसागर जैसा सुनने में आएंगे।