u/Flimsy_Pause5677

▲ 3 r/Hindi

डगर समाप्ति को आई

क्या ये सांस मंजिल तक पहुंच पाई?

१.प्रारंभ मनमोहक वन से जिसका

हरियाली की सुंदर छटा छाई,

अंत शूल-पथ पर हुआ उसका

सारी पत्तियाँ हैं मुरझाईं।

२.क्या प्रश्नों के उत्तर नहीं?

शायद प्रश्न किसी तक पहुँचे ही नहीं।

सब राहगीर हैं सकुचे ऐसे,

जैसे किसी में होश ही नहीं।

३.हमें तो बताया गया था—

ये रास्ता स्वर्ग ले जाता है,

नर्क से भी बुरा हाल यहाँ,

कैसा झूठ फैलाया जाता है।

४.जिन पेड़ों पर न चली कभी कुल्हाड़ी,

क्यों उन पर सीधे चलाई गई वीभत्स आरी?

इससे अच्छा तो जड़ से उखाड़ देते

अब प्रतिदिन घुट घुट कर जान जा रही।

५.जो पेड़ फूल-फलों से लदा रहता था,

उस पर अब पत्तियाँ भी न आ रहीं,

खाद और पानी का वादा करके

उसपर अमर बेल क्यों डाली?

६.ये रास्ता नहीं है—

ये है सर्प रूपी शिक्षा तंत्र,

जो धन का झूठा लोभ देकर

मार रहा हर दिन डंक।

७.पेड़रूपी बच्चों को मार

फल-फूल सी उनकी

कलाओं पर कर वार

बना रहा उन्हें गुलाम।

८.लोभियों ने सपनों का व्यापार किया

लाचार बच्चों ने स्व प्राणों पर वार किया

तंत्र हुआ ऐसा नष्ट - भ्रष्ट

जो मरा नहीं उसे भी मार दिया।

९.ये प्रथा चली है रीतियों से

परिवर्तन हो न जिसका

है यही प्रार्थना ईश्वर से

अंत कभी तो होगा इसका।

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u/Flimsy_Pause5677 — 10 days ago