
Recently tried bumble, I heard things like cafe and bar commissions thing for girls to bring clients mostly in Delhi and Bengaluru.
Ab ye Banaras me bhi start ho gya kya? Ya ye genuine hai?

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मैं यहा केवल अधिकारियों का ही नहीं मंत्रियों, ग्राम पंचायत से लेकर बिजली विभाग और बाक़ी सबकी भी बात कर रहा।
न्यूज़ में दिखाते है कि सब मुख्यमंत्री से डर रहे है लेकिन काम तो कहीं से नहीं होता दिख रहा, मैं सुबह से घर से निकालने की दिनचर्या से शुरू करता हूँ।
घर में स्मार्ट मीटर से परेशान हो के सोलर लगवाया अब हर महीने विभाग दौड़ रहा सरप्लस यूनिट को बिल में समायोजित करने के लिए, सबके साथ यही है बोल कर विभाग टाल देता है, वीडियो रिकॉर्डिंग करने पर भड़क जाते है।
13 साल से सड़क नालों की मरम्मत नहीं हुई तो मुख्यमंत्री पोर्टल और आईजीआरएस और सीजीग्राम्स में कंप्लेंट की, लेकिन बिना समाधान के कंप्लेन क्लोज कर दी जाती है, कोई जवाबदेही नहीं।
आज भी कॉलोनी के बाहर 3 मीटर की सड़क बनी है, वो भी लो क्वालिटी, 3 मीटर सच में दो कार भी अगल बगल से नहीं निकल सकती, भाई 2026 आ गया, कहाँ से सर्वे करते है आप अधिकारी लोग, सारा दिमाग़ नौकरी पाने में ही ख़त्म हो जाता है क्या?
नाली की सफाई अगर कंप्लेंट ना की जाये तो 2-2 साल तक नहीं होती और कंप्लेंट करने पर सचिव कॉल करके बोलता है सर हमे कॉल कर लिया कीजिए कंप्लेंट से हमारी छवि ख़राब होती है, छवि? तुम नेता हो क्या?
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पे टोल कभी 3 मिनट से पहले नहीं खुला और सड़क आए दिन कहीं ना कहीं बीच में बनती रहती है।
नौकरियाँ तो आना ही बंद हो गई और आई भी तो एग्ज़ाम्स लीक हो जाते हैं।
जमीन खरीदना बेचना तो सबसे भयावह एक्सपीरियंस है, मुख्यमंत्री जी सब कुछ ऑनलाइन और समयबद्ध होने की बात करते है और तहसील में अधिकारी आए दिन छुट्टी और बाकी बहाने से काम को टाल कर 6 महीने से 1 साल और कभी कभी तो उससे भी ज़्यादा ले जाते है सारा मकड़जाल दलालो का है।
तेल में एथनॉल की मिलावट कार की माइलेज खा रही है और इंश्योरेंस वाले आराम से बिना डर के क्लेम रिजेक्ट कर देते है।
हर खाने पाइन की चीज़ में मिलावट और डेरी प्रोडक्ट्स पे तो जैसे यकीन ही नहीं रह गया।
सड़क किनारे सिर्फ़ बिजली के खम्बे दिखते है एक भी पेड़ नहीं क्या इन्हें अंडरग्राउंड नहीं किया जा सकता था और पेड़ नहीं लगाए जा सकते थे।
पुलिस से लोग डरते है, क्युकी वो पैसे वालो की साइड लेते है, ग़रीब को बिना सोचे थप्पड़ जड़ देते हैं, कैमरा युग ने इसका भी खुलासा किया।
कोई सिस्टम फॉलो नहीं करता चाहे सड़क हो या ऑफिस, कानून का कोई भय नहीं।
पुलिस वालो की कार या बाइक देखो तो ना एचएसआरपी मिलेगी ना हेलमेट जैसे वो कानून के रक्षक नहीं ख़ुद कानून है।
हवा प्रदूषित, शहर गरम, पानी ख़राब, दूसरे देशों पर ऊर्जा से लेकर यूरिया तक के लिए निर्भरता
आख़िर हम कैसा देश बना रहे हैं…
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